क्या एचआईवी या हेपेटाइटिस बी अधिक संक्रामक है?HealthPlanet

Posted on Mon 5th Dec 2022 : 16:08

एचआईवी से 100 गुना ज़्यादा संक्रामक हैपेटाइटिस-बी, 60 मामले मानसून में दर्ज होते हैं, कारण दूषित पानी

हेल्थ डेस्क. हेपेटाइटिस यानी लिवर में सूजन। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने संक्रामक हेपेटाइटिस को एक प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या के रूप में चिन्हित किया है। अकेले भारत में ही क़रीब 1 करोड़ से अधिक लोग हेपेटाइटिस-सी से ग्रस्त हैं। यह हेपेटाइटिस वायरस से फैलता है। हेपेटाइटिस के अधिकतर संक्रमित मरीज़ों को पता ही नहीं होता कि वे इस रोग की ज़द में हैं। भारत में हेपेटाइटिस-बी से पीड़ित लोगों की संख्या 4 करोड़ के आसपास है। हेपेटाइटिस-बी एचआईवी की बीमारी से 100 गुना ज़्यादा संक्रामक है। इसके लगभग 60 प्रतिशत मामले मानसून के दौरान दर्ज किए जाते हैं क्योंकि हैपेटाइटिस 'ए' और 'ई' प्रदूषित जल की वजह से होता है। इस मौसम में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है इसलिए उन लोगों में इससे प्रभावित होने की सम्भावनाएं अधिक हो जाती हैं। ऑनक्वेस्ट लेबोरेटरीज़ के सीओओ डॉ. रवि गौर से जानते हैं इससे कैसे बचें... सवाल: यह कितने प्रकार का होता और संक्रमण के कारण क्या हैं? जवाब: हेपेटाइटिस कई प्रकार का होता है। इसके फैलने के कारण भी अलग-अलग हैं। जैसे... हेपेटाइटिस ए- यह दूषित भोजन और जल से फैलता है। हेपेटाइटिस बी- संक्रामक रक्त या किसी दूसरे द्रव्य पदार्थों के सम्पर्क में आने पर यह फैल सकता है। हेपेटाइटिस सी- एचसीवी (हेपेटाइटिस -सी वायरस) के कारण होता है और संक्रमित ख़ून या इंजेक्शन के इस्तेमाल से होता है। हेपेटाइटिस डी- डी वायरस के कारण होता है। जो पहले से ही हेपेटाइटिस बी से ग्रसित होते हैं वे ही इससे संक्रमित होते हैं। एचडीवी व एचबीवी दोनों के साथ होने पर स्थिति बद्तर हो जाती है। हेपेटाइटिस ई- अधिकतर प्रदूषित जल और भोजन से फैलता है। अन्य कारणों में अल्कोहल, विषैली दवाएं और ऑटोइम्यून डिज़ीज़ के कारण भी व्यक्ति इसका रोगी हो सकता है। सवाल: इसके लक्षण दूसरे इंफेक्शन के कितने अलग हैं और कैसे पहचानें? जवाब: सामान्यतौर पर यह हेपेटाइटिस वायरस से फैलता है। शराब या दूसरे चिकित्सकीय कारण से भी हो सकता है। एक बार इंफेक्शन होने पर 2 से 4 हफ्तों में ही शुरुआती लक्षण दिखाई देने लगते हैं। हालांकि कुछ परिस्थितियों में 8 हफ़्तों का भी समय लग सकता है। अगर बहुत ज़्यादा थकान और कमज़ोरी लगे, कुछ खाने का मन न करे, मतली-उल्टी आए और बुखार महसूस हो तो डॉक्टर को दिखाएं। मांसपेशियों या शरीर या पेट में में दर्द होना, पेशाब का रंग गहरा होना, त्वचा और आंखों में पीलापन (पीलिया) व त्वचा में खुजली होना इसके मुख्य लक्षण हैं। सवाल: इस बीमारी का खतरा किस उम्र वर्ग के लोगों को ज्यादा होता है? जवाब: 50 साल से अधिक उम्र के लोग या जो लम्बे समय से लिवर की बीमारी का सामना कर रहे हों उन्हें इसका ख़तरा ज़्यादा होता है। उन्हें और भी ज़्यादा गम्भीर बीमारी हो सकती है जिसे फुल्मिनेंट हेपेटाइटिस-'ए' वायरस कहते हैं। इसके लक्षणों में रक्तस्राव, भ्रम की स्थिति निर्मित होना, कंपकंपी आदि शामिल हैं। सवाल: इस बीमारी में जान का जोखिम कितना होता है? जवाब: हेपेटाइटिस 'ए' के क़रीब 1 फ़ीसदी मामलों में ही लिवर फेल होता है। हेपेटाइटिस-ई में लिवर फेल के केस अधिक सामने आते हैं, और क़रीब 3 प्रतिशत मामलों में जान जाने का जोखिम रहता है। कोई भी लक्षण सामने आने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें। यह एक जानलेवा बीमारी है और इसका सही तरह से इलाज होने पर ही पूरी तरह से बचाव संभव है। हेपेटाइटिस धीरे-धीरे लिवर पर प्रभाव डालता है और यह भी संभव है कि इसके लक्षण साफ़ दिखाई न दें। इसी तरह यह ठीक भी धीरे-धीरे ही होता है इसलिए इसमें कई हफ्तों से लेकर महीनों तक का भी समय लग सकता है। सवाल: इससे कैसे बच सकते हैं और किन बातों का ध्यान रखें? जवाब: हेपेटाइटिस 'ए' के लिए वैक्सीन भी उपलब्ध है जिसकी दो ख़ुराक 6-6 महीने के अंतर पर दी जाती है। यह वैक्सीन हेपेटाइटिस 'ए' के खिलाफ़ लगभग 95 प्रतिशत तक सुरक्षा प्रदान करती है। चिकित्सा विज्ञान में हुई प्रगति की वज़ह से आज हमारे पास अंतरराष्ट्रीय तौर पर अनेकों वैक्सीन उपलब्ध हैं। हेपेटाइटिस 'ए' और 'ई' का कोई विशेष उपचार नहीं है और जीवनशैली में सामान्य सावधानियां बरतकर इससे दूर रहा जा सकता है। शरीर को पर्याप्त आराम दें, भोजन में हेल्दी चीजें लें। इसमें उल्टी और डायरिया के कारण हुई तरल पदार्थों की पूर्ति करना भी शामिल है। बाहर का खाना और स्ट्रीट फूड से परहेज़ करें। खाना अच्छी तरह पकाकर ही खाएं। पीने के पानी के स्थान को साफ़ रखें, स्वच्छ पानी पिएं।

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